फिस्टुला का होम्योपैथिक उपचार | भगंदर का होम्योपैथिक इलाज

बवासीर (piles), फिशर (fissure) और फिस्टुला या भगंदर – ये सभी रोग गुदा से संबंधित हैं । हम अक्सर इन तीन बीमारियों के बारे में समझने में गड़बड़ करते हैं । लेकिन यहाँ हम फिस्टुला (fistula) के बारे में चर्चा करेंगे। कई सारे बीमारी के तरह, फिस्टुला का होम्योपैथिक उपचार ( fistula treatment in homeopathy in hindi ) है। रोगसूचक भगंदर का होम्योपैथिक इलाज नीचे वर्णित हैं।

भगंदर या फिस्टुला क्या है ?

भगंदर या फिस्टुला ( fistula ) मलाशय से एक ट्यूब जैसा मार्ग है जो मलद्वार के पास में एक छेद बनाता है।

फिस्टुला होने का कारण

भगंदर या फिस्टुला विकसित होने के अलग अलग कारण हो सकते हैं। जैसे की –

  • मलाशय में फोड़ा होने के कारण हो सकता है ।
  • मलाशय की सर्जरी के बाद हो सकता है।
  • विभिन्न प्रकार के आंतों की सूजन की बीमारी के बाद हो सकता है।
  • यौन रूप से संक्रामित संक्रमण ।
  • यक्ष्मा।
  • मलाशय में आघात/असामान्य संरचना या विकास।

फिस्टुला का होम्योपैथिक उपचार | भगंदर का होम्योपैथिक इलाज

Ratanhia Q – मलत्याग के पहले और बाद बहुत देर तक मलद्वार में जलन महसूस होना, गुदा से पानी जैसा तरल गिरता है, ठंडा पानी डालने से आराम मिलता है

Acid nit 200 – निर्वहन के दौरान और बाद में बहुत जलन होती है, गुदा फट जाता है और संक्रमण होता है

Paeonia Q – गुदा से सदैव पानी जैसा तरल गिरता है, गुदा हमेशा गीला रहता है, मवाद होता है, बहुत दर्द होता है।

Graphites 200 – गुदा में संक्रमण, रक्तरस (Plasma) निकलता है, गुदा के अंदर कांटे चुभने जैसे महसूस होता है

Aurum Mur 200 – फिस्टुला के लक्षण के लिए सबसे अच्छी दवा है

Silicea 200 – कब्ज है, मवाद पानी जैसे पतला और बदबूदार होता है

Hepar sulph 200 – १/२ हप्ता के बाद बाद में गुदा में सूजन और दर्द महसूस होता है, थोड़ा सा मवाद निकलने के बाद आराम मिलता है।

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